ABTAK EXCLUSIVE

महाशिवरात्रि पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़

जाने कैसे करें शिव की पूजा

MahaShivratri News LIVE: देशभर के शिवालयों में उमड़ा भक्तों का सैलाब, देखें फोटो व वीडियो

 महाशिवरात्रि  हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना करने के लिए देश के कई हिस्सों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ भगवान शिव के मंदिरों में नजर आ रही है। मान्‍यता है कि इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, बेर और भांग चढ़ाने से भक्‍तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उसे महादेव की विशेष कृपा मिलती है।

महाशिवरात्रि का शुभ मुहू्र्त

21 तारीख को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से 22 फरवरी, शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी। महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। महाशिवरात्रि पर रात्रि में चार बार शिव पूजन की परंपरा है।

पूजा की विधि

हिंदू धर्म के अनुसार भगवान शिव पर पूजा करते वक्त बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से आपकी सारी समस्याएं दूर होंगी साथ ही मांगी हुई मुराद भी पूरी होगी।

शिव का अभिषषेक करने से धन,भूमि,ऐश्वर्य की होगी प्राप्ति

वैसे तो भगवान शिव जल से प्रसन्न होने वाले देव हैं। इसलिए शिव का जलाभिषषेक करने की परंपरा है, लेकिन विभिन्न रस पदार्थो से शिव का अभिषषेक करने से मनुष्य को धन, भूमि, ऐश्वर्य आदि की प्राप्ति भी होती है।

  • गन्ने के रस से अभिषषेक करने पर धन की प्राप्ति
  • शहद से अभिषषेक करने पर ऐश्वर्य की प्राप्ति
  • नारंगी के रस से अभिषषेक करने पर नवग्रहों की अनुकूलता
  • अंगूर के रस से अभिषषेक करने पर भूमि की प्राप्ति
  • नारियल पानी से अभिषषेक करने पर आकस्मिक धन लाभ

साधना की सिद्धि के लिए शिवरात्रि विशेष

वर्ष में शरद पूर्णिमा, दीपावली, होली तथा महाशिवरात्रि की रात साधना की सिद्धि के लिए विशेषष मानी गई है। शिवतंत्र में वैदिक उपासकों का अपना महत्व है। महाशिवरात्रि में वैदिकतंत्र की साधना विशेष फल प्रदान करने वाली मानी गई है। यदि अपर रात्रि से ब्रह्म मुहूर्त के मध्य ध्यान साधना से स्तवन किया जाए तो साक्षात शिव की प्राप्ति होती है।